भारतीय अर्थव्यवस्था

भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र 

  • प्राथमिक क्षेत्र – इसके अंतर्गत कृषि ,पशुपालन ,मछली पालन ,जंगलों से वस्तुओं को प्राप्त करना आदि व्यवसाय आते हैं।
  • द्वितीयक क्षेत्र – के अंतर्गत उद्योग ,खनिज व्यवसाय ,निर्माण कार्य आदि आते हैं।
  • तृतीयक क्षेत्र – यह सेवा क्षेत्र कहलाता है। इसमें बैंक,बीमा ,परिवहन संचार एवं व्यापार जैसी क्रियाएँ आती हैं।

अर्थव्यवस्था के प्रकार

विश्व में तीन प्रकार की अर्थव्यवस्थाएं पायी जाती हैं

  1. पूंजीवादी अर्थव्यवस्था – इसमें उत्पादन के साधनो पर निजी व्यक्तियों का स्वामित्व होता है जिसका उपयोग अपने निजी लाभ के लिए करते है। जैसे – अमेरिका, फ्रांस, जापान आदि।
  2. समाजवादी अर्थव्यवस्था – इसमें उत्पादन के साधनो का स्वामित्व एवं नियंत्रण सरकार के पास होता है जिसका उपयोग सामाजिक कल्याण के लिए किया जाता है। जैसे – चीन, क्यूबा आदि देश।
  3. मिश्रित अर्थव्यवस्था – जहाँ उत्पादन के साधनो का स्वामित्व सरकार तथा निजी व्यक्तियों के पास होता है। भारत में मिश्रित अर्थव्यवस्था है।

भारत में आर्थिक नियोजन

  • योजना आयोग की स्थापना 15 मार्च 1950 को नियोगी समिति की सिफारिश पर हुयी थी। यह एक गैर संवैधानिक संस्था थी। इसका गठन सरकार के प्रस्ताव से हुआ था। 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग को समाप्त कर उसकी जगह नीति (NITI) आयोग का गठन किया गया।
  • राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) का गठन 6 अगस्त 1952 को किया गया। यह पंचवर्षीय योजनाओं को अंतिम रूप से अनुमोदन करती थी।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लक्षण 

  1. प्रतिव्यक्ति कम आय;
  2. जनसँख्या के एक बड़े भाग का प्राथमिक क्षेत्र में संलग्न होना;
  3. तकनीकी पिछड़ापन;
  4. पूंजी की कमी;
  5. दोषपूर्ण संपत्ति वितरण;
  6. बेरोजगारी;
  7. बड़ी जनसँख्या।

राष्ट्रीय आय

  • राष्ट्रीय आय द्वारा किसी अर्थव्यवस्था में प्रतिवर्ष वस्तुओं और सेवाओं के प्रवाह का अनुमान लगाया जाता है।
  • एक वर्ष में जो अंतिम वस्तुए तथा सेवाएं उत्पन्न होती है, उनके बाजार मूल्य के जोड़ को राष्ट्रीय आय कहते है।
  • राष्ट्रीय आय का अनुमान केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) लगाता है।
  • सकल घरेलु उत्पाद (gross domestic product) – किसी देश की सीमा के अंदर किसी भी दिए गए समयावधि, प्रायः एक वर्ष में उत्पादित समस्त अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं का कुल बाजार या मौद्रिक मूल्य उस देश का सकल घरेलु उत्पाद (GDP) कहा जाता है।
  • सकल राष्ट्रीय उत्पाद (gross national product) – किसी देश में एक साल के अंतर्गत जितनी वस्तुअों तथा सेवाओं का उत्पादन होता है उसके मौद्रिक मूल्य को कुल राष्ट्रीय उत्पाद कहा जाता है। कुल (सकल) राष्ट्रीय उत्पाद निकलने के लिए सकल घरेलु उत्पादन में देशवाशियों द्वारा विदेशों में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को जोड़ दिया जाता है तथा विदेशियों द्वारा देश में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को घटा दिया जाता है।
  • शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (net national product) – सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) में से मूल्य ह्रास की राशि घटाकर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद ज्ञात किया जाता है।
  • प्रतिव्यक्ति आय (per capita income) -उस आय को कहा जाता है जब किसी देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद को जब उस देश की उस वर्ष की मध्यावधि तिथि (1 जुलाई) की जनसंख्या से विभाजित किया जाता है।

One Response

  1. Akshit जनवरी 21, 2016

Leave a Reply

error: सेलेक्ट नहीं कर सकते