राजा राममोहन राय
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आधुनिक भारत में सामाजिक-धार्मिक आंदोलन:

19वीं शताब्दी में उदीयमान राष्ट्रीय चेतना ने प्रबुद्ध भारतीयों को प्रेरित किया कि वे अपने सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं में समय के अनुरूप कुछ सुधार करें।  इस समय हिन्दू, इस्लाम, पारसी, सिख आदि सभी भारतीय समुदाय आत्मावलोकन तथा सुधार की भावना से प्रेरित हुए।

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ब्रह्म समाज

ब्रह्म समाज आधुनिक युग का प्रथम धर्म-सुधार आन्दोलन था। इसके संस्थापक राजा राममोहन राय  थे, जिन्होने 1828 ई. में इसकी स्थापना कोलकाता में की थी। इसका मुख्य उद्देश्य तत्कालीन हिन्दू समाज में व्याप्त बुराईयों, जैसे- सती प्रथा, बहुविवाह, जातिवाद, अस्पृश्यता आदि को समाप्त करना। राजा राममोहन राय को भारतीय पुनर्जागरण का अग्रदूत माना जाता है। राममोहन राय पहले भारतीय थे, जिन्होंने समाज में व्याप्त मध्ययुगीन बुराईयों को दूर करने के लिए आन्दोलन चलाया। देवेन्द्रनाथ टैगोर ने भी ब्रह्मसमाज को अपनी सेवाएँ प्रदान की थीं। उन्होंने ही केशवचन्द्र सेन को ब्रह्मसमाज का आचार्य नियुक्त किया था। केशवचन्द्र सेन का बहुत अधिक उदारवादी दृष्टिकोण ही आगे चलकर ब्रह्मसमाज के विभाजन का कारण बना। राजा राममोहन राय को भारत में पत्रकारिता का अग्रदूत माना जाता है। इन्होंने संवाद कौमुदी तथा मिलाते उल अखबार पत्र निकाला।

प्रार्थना समाज

प्रार्थना समाज की स्थापना वर्ष 1867 ई. में बम्बई  में आचार्य केशवचन्द्र सेन की प्रेरणा से महादेव गोविन्द रानाडे, डॉ. आत्माराम पांडुरंग, चन्द्रावरकर आदि द्वारा की गई थी। जी.आर. भण्डारकर प्रार्थना समाज के अग्रणी नेता थे। प्रार्थना समाज का मुख्य उद्देश्य जाति प्रथा का विरोध, स्त्री-पुरुष विवाह की आयु में वृद्धि, विधवा-विवाह, स्त्री शिक्षा आदि को प्रोत्साहन प्रदान करना था।

आर्य समाज

आर्य समाज की स्थापना 1875 ई. में स्वामी दयानंद सरस्वती  द्वारा बंबई में की गई। इसका उद्देश्य वेद कालीन सामाजिक धार्मिक व्यवस्था  को पुनः शुद्ध रूप से स्थापित करने का प्रयास करना, भारत को धार्मिक, सामाजिक व राजनीतिक रूप से एक सूत्र में बांधने का प्रयत्न, पाश्यात्य प्रभाव को समाप्त करना आदि था।

रामकृष्ण मिशन 

रामकृष्ण मिशन की स्थापना स्वामी विवेकानन्द  ने  1897 ई. में की थी। स्वामी विवेकानन्द ने शिकांगो में हुई धर्म संसद में भाग लेकर पाश्चात्य जगत को भारतीय संस्कृति एवं दर्शन से अवगत कराया। धर्म संसद में स्वामी जी ने अपने भाषण में भौतिकवाद एवं आध्यात्मवाद के मध्य संतुलन बनाने की बात कही। विवेकानन्द ने पूरे संसार के लिए एक ऐसी संस्कृति की कल्पना की, जो पश्चिमी देशों के भौतिकवाद एवं पूर्वी देशों के अध्यात्मवाद के मध्य संतुलन बनाने की बात कर सके तथा सम्पूर्ण विश्व को खुशियाँ प्रदान कर सके।

थियोसोफिकल सोसायटी

थियोसोफ़िकल सोसाइटी की स्थापना वर्ष 1875 ई. में न्यूयॉर्क में तथा इसके बाद 1886 ई. में चेन्नई अडयार में की गई थी। इसके संस्थापक मैडम हेलना पेट्रोवना व्लावात्सकी  एवं कर्नल हेनरी स्टील ऑल्काट  थे। थियोसोफ़िकल सोसाइटी का मुख्य उद्देश्य धर्म को आधार बनाकर समाज सेवा करना, धार्मिक एवं भाईचारे की भावना को फैलाना, प्राचीन धर्म, दर्शन एवं विज्ञान के अध्ययन में सहयोग करना आदि था। भारत में इसकी व्यापक गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने का श्रेय एनी बेसेंट को दिया जाता है।

यंग बंगाल आंदोलन

यंग बंगाल आन्दोलन की स्थापना वर्ष 1828 ई. में बंगाल में की गई थी। इसके संस्थापक हेनरी विविनय डेरोजियो (1809-1831 ई.) थे। इस आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य प्रेस की स्वतन्त्रता, ज़मींदारों द्वारा किये जा रहे अत्याचारों से किसानों की सुरक्षा, सरकारी नौकरियों में ऊँचे वेतनमान के अन्तर्गत भारतीय लोगों को नौकरी दिलवाना था। एंग्लों-इंडियन डेरोजियो ‘हिन्दू कॉलेज’ में अध्यापक थे। वे फ़्राँस की महान् क्रांति से बहुत प्रभावित थे।

अलीगढ़ आंदोलन

अलीगढ़ आन्दोलन की शुरुआत अलीगढ़ से हुई थी। इस आन्दोलन के संस्थापक सर सैय्यद अहमद ख़ाँ  थे।  सैय्यद अहमद ने 1839 ई. में ईस्ट इंडिया कम्पनी में नौकरी कर ली। कम्पनी की न्यायिक सेवा में कार्य करते हुए 1857 ई. के विद्रोह में उन्होंने कम्पनी का साथ दिया। 1870 ई. के बाद प्रकाशित डब्ल्यू. हण्टर की पुस्तक इण्डियन मुसलमान में सरकार को यह सलाह दी गई थी कि वे मुसलमानों से समझौता कर तथा उन्हें कुछ रियायतें देकर अपनी ओर मिलाये।

बहावी आंदोलन

वहाबी आन्दोलन 1830 ई. से प्रारम्भ होकर 1860 ई. चलता रहा था। इतने लम्बे समय तक चलने वाले ‘वहाबी आन्दोलन’ के प्रवर्तक रायबरेली के सैय्यद अहमद  थे। यह विद्रोह मूल रूप से मुस्लिम सुधारवादी आन्दोलन था, जो उत्तर पश्चिम, पूर्वी भारत तथा मध्य भारत में सक्रिय था। सैय्यद अहमद इस्लाम धर्म में हुए सभी परिवर्तनों तथा सुधारों के विरुद्ध थे। उनकी इच्छा हजरत मोहम्मद के समय के इस्लाम धर्म को पुन:स्थापित करने की थी।

अहमदिया आंदोलन

अहमदिया आन्दोलन की स्थापना वर्ष 1889 ई. में की गई थी। इसकी स्थापना गुरदासपुर (पंजाब) के कादिया नामक स्थान पर की गई। इसका मुख्य उद्देश्य मुसलमानों में इस्लाम धर्म के सच्चे स्वरूप को बहाल करना एवं मुस्लिमों में आधुनिक औद्योगिक और तकनीकी प्रगति को धार्मिक मान्यता देना था। अहमदिया आन्दोलन की स्थापना मिर्ज़ा ग़ुलाम अहमद  द्वारा 19वीं शताब्दी के अंत में की गई थी।

देवबंद स्कूल

देवबन्द स्कूल की स्थापना मुहम्मद क़ासिम ननौती  एवं गुलाम अहमद गंगोही  द्वारा की गई थी। इस स्कूल की शुरुआत 1866-1867 ई. में देवबन्द, सहारनपुर से की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य मुस्लिम सम्प्रदाय के लिए धार्मिक नेता तैयार करना, विद्यालय के पाठ्यक्रमों में अंग्रेज़ी शिक्षा एवं पश्चिमी संस्कृति को प्रतिबन्धित करना, मुस्लिम सम्प्रदाय का नैतिक एवं धार्मिक पुनरुद्धार करना तथा अंग्रेज़ सरकार के साथ असहयोग करना था।

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