ऋग्वैदिक काल

ऋग्वैदिक काल
  • समय – 1500 ईसा पूर्व से 1000 ईसा पूर्व तक
  • आर्यों का मूल स्थान मध्य एशिया में बैक्ट्रिया था। यह सर्वमान्य मत है।
  • बालगंगाधर तिलक के अनुसार आर्य उत्तरी ध्रुव से आये थे।
  • भारत में आर्य सबसे से पहले सप्तसैंधव क्षेत्र में बसे।
  • सप्तसैंधव का अर्थ है सात नदियों का देश। ये सात नदियाँ इस प्रकार थी –
  1. शतुद्री – सतलज
  2. विपश – व्यास
  3. परुषणी – रावी
  4. अस्किनी – चिनाब
  5. वितस्तता – झेलम
  6. सरस्वती
  7. दृश्द्वती – घग्गर
  • इनके अलावा आर्य गोमल (गोमती), क्रमु (कुर्रम) एवं सुवास्तु (स्वात) नदियों से भी परिचित थे।
  • ऋग्वेद में सबसे ज्यादा सिन्धु नदी का उल्लेख हुआ है जबकि सरस्वती सर्वाधिक पवित्र नदी मानी जाती थी।
  • आर्य हिमालय के एक चोटी जिसमे सोम नामक पौधा प्राप्त होता था, से भी परिचित थे।
  • पाँच प्रमुख कबीले थे जिन्हें पंचजन कहा गया।
  • दशराज युद्ध में आर्यों को ऋषि वाल्मीकि तथा अनार्यों को विश्वामित्र का समर्थन प्राप्त था।
  • दशराज युद्ध में भरतवंशी राजा ‘सुदास’ के नेतृत्व में आर्यों की विजय हुई।
  • हमारे देश भारतवर्ष आर्यों के ‘भरतवंशी’ राजा भरत के नाम पर पड़ा।
  • ऋग्वेदिक समाज का वर्गीकरण व्यवसाय के आधार पर इस प्रकार किया गया था –
  1. पुरोहित (ब्राह्मण)
  2. राजन्य (क्षत्रिय)
  3. वैश्य (कृषक, कारीगर, व्यापारी)
  4. शूद्र (दास तथा अनार्य)।
  • ऋग्वैदिक समाज में परिवार के मुखिया को कुलप्पा कहा जाता था।
  • ऋग्वैदिक समाज पितृसत्तात्मक होते हुए भी उसमें ‘महिलाओं’ की स्तिथि अच्छी थी।
  • ऋग्वैदिक समाज में एक-विवाह (Monogamy) की प्रथा थी तथा इस काल में सती प्रथा एवं पर्दा प्रथा का अस्तित्व नहीं था।
  • स्त्रियों को वेदों का अध्ययन करने तथा अपने पति के साथ सार्वजनकि सभाओं तथा उत्सवों में भाग लेने का अधिकार था।
  • ऋग्वैदिक काल की कुछ स्त्रियां विश्ववरा, अपाला,घोष एवं लोपमुद्रा वैदिक मंत्रों की रचना करने के लिए जानी जाती हैं।
  • ऋग्वैदिक काल में विधवा विवाह का प्रचलन तो था परन्तु बाल-विवाह का नहीं।
  • ऋग्वेद में दास तथा दस्यु का उल्लेख है।
  • ऋग्वैदिक समाज कबायली-समाज था।
  • गाँव का प्रमुख ग्रमिणी होता था।

 

निरंतर….

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