भारतीय संविधान : महत्वपूर्ण तथ्य भाग 1

भारतीय संविधान : महत्वपूर्ण तथ्य

कंपनी शासन पर संसदीय नियंत्रण

  • 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के द्वारा ब्रिटेन की संसद ने पहली बार भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों का नियंत्रण करने का प्रयास किया।
  • 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के द्वारा बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर जनरल पद नाम देकर उसे बंबई और मद्रास के गवर्नर पर नियंत्रण और अधीक्षण की शक्ति दी गई।
  • वारेन हेस्टिंग्स बंगाल का पहला गवर्नर जनरल बना।
  • 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के द्वारा कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की गई।
  • सर एलीजा इम्पे को कंपनी प्रशासित क्षेत्र का प्रथम मुख्य न्यायाधीश बनाया गया।
  • लेकिन भारत में संघीय न्यायालय की स्थापना 1935 के भारत शासन अधिनियम के द्वारा 1, अक्टूबर 1937 में की गई। सर मौरिस ग्वैयर को संघीय न्यायालय का पहले मुख्य न्यायाधीश बनाया गया।
  • भारतीयों को भारत के प्रशासन में बिना किसी भेदभाव के भाग लेने का अधिकार सैद्धांतिक रूप से 1833 के चार्टर एक्ट द्वारा प्रदान किया गया।
  • नियंत्रण बोर्ड या बोर्ड आफ कंट्रोल की स्थापना पिट्स इंडिया एक्ट 1884 द्वारा किया गया।
  • 1813 के चार्टर एक्ट के द्वारा ईसाई मिशनरियों को भारत में काम करने की अनुमति दी गई।
  • 1833 के चार्टर एक्ट के द्वारा गवर्नर जनरल के परिषद में एक विधि सदस्य का प्रावधान किया गया।
  • इल्बर्ट बिल का प्रस्ताव 1883 में लार्ड रिपन ने किया था जिसमें यह प्रावधान किया गया था कि भारत में रह रहे यूरोपियों से संबंधित मुकदमों की सुनवाई भारतीय न्यायाधीश भी कर सकते थे। इस प्रकार इस विधेयक का उद्देश्य दांडिक अधिकारिता के संबंध में भारतीय और यूरोपीय न्यायाधीशों को बराबरी देना था।

भारतीय परिषद् अधिनियम (1892)

1892 के भारतीय परिषद अधिनियम के द्वारा विधान परिषद के कार्यों में वृद्धि की गई। अब विधान परिषद के सदस्य कार्यपालिका से प्रश्न कर सकते थे, पूरक प्रश्न कर सकते थे तथा बजट पर बहस भी कर सकते थे लेकिन मतदान नहीं कर सकते थे।


भारत शासन अधिनियम (1909)

1909 के अधिनियम के द्वारा विधानपरिषदों में मुस्लिमों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था की गई जिसके अनुसार मुस्लिम सदस्यों को केवल मुसलमान मतदाता ही चुनते। इसे सांप्रदायिक निर्वाचन प्रणाली के नाम से जाना जाता है।

भारत शासन अधिनियम (1919 तथा 1935)

  • भारत शासन अधिनियम 1919 ब्रिटेन की संसद द्वारा पारित किया गया था। जिसका उद्देश्य भारतीय शासन में भारतीयों की भागीदारी बढ़ाना था।
  • प्रांतों में द्वैध शासन की व्यवस्था को 1919 के मांटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधार  पर आधारित भारत शासन अधिनियम 1919 के द्वारा लागू किया गया।
  • द्वैध या दोहरा शासन के अंतर्गत प्रांतीय शासन से संबंधित विषयों को दो प्रकारों में बांटा गया :- आरक्षित और हस्तान्तरित। हस्तांतरित विषयों का प्रशासन लोकप्रिय मंत्रियों की सहायता से गवर्नर द्वारा चलाया जाता था। आरक्षित विषयों का प्रशासन अधिकारियों के सहयोग से गवर्नर द्वारा चलाया जाता था।
  • प्रांतीय स्वायत्तता 1935 के भारत शासन अधिनियम के द्वारा लागू की गई।
  • 1935 के अधिनियम के द्वारा केंद्र में दोहरा शासन अपनाया​ गया।
  • 1935 के अधिनियम में एक अखिल भारतीय महासंघ स्थापित करने का भी प्रावधान था जिसका निर्माण ब्रिटिश भारत के प्रांतों, चीफ कमिश्नरों के प्रांतों और देशी रियासतों को मिला कर किया जाना था। चूंकि महासंघ की यह योजना स्वैच्छिक थी इसलिए लागू नहीं की जा सकी क्योंकि देशी राज्यों की कभी ऐसी कोई इच्छा नहीं हो सकती थी।

संविधान सभा: गठन एवं कार्य

  • भारतीयों के लिए एक निर्वाचित संविधान सभा द्वारा संविधान लिखे जाने का अंग्रेजों द्वारा सबसे पहले उल्लेख क्रिप्स मिशन के प्रस्ताव में किया गया। लेकिन संविधान सभा का गठन द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद किए जाने का आश्वासन था।
  • भारतीयों द्वारा संविधान बनाने वाली संविधान सभा की मांग सबसे पहले स्वराज्य पार्टी के एक प्रस्ताव में मई 1934 में किया गया था।
  • जून 1945 में वायसराय वेवेल ने भारत में राजनीतिक गतिरोध दूर करने के लिए एक योजना प्रस्तुत किया। वेवेल प्लान के अनुसार वायसराय की कार्यकारिणी में स्वयं वायसराय और कमांडर इन चीफ को छोड़कर बाकी सभी सदस्य भारतीय होंगे। कार्यकारिणी में हिंदू और मुसलमानों को बराबर की संख्या में स्थान दिए जाने तथा विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद भारतीयों द्वारा खुद का संविधान बनाना आदि प्रस्ताव थे।
  • कैबिनेट मिशन 1946 में भारत आया। इसमें एक संविधान सभा के गठन का प्रावधान था। इसी के अनुसार संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव राज्य विधानसभा के सदस्यों द्वारा किया गया। मोटे तौर पर दस लाख लोगों पर एक प्रतिनिधि संविधान सभा के सदस्य के रूप में चुना गया। इस प्रकार संविधान सभा अप्रत्यक्ष निर्वाचन का परिणाम थी।
  • संविधान सभा ने 9, दिसंबर 1946 से काम करना शुरू किया।
  • 9, दिसंबर 1946 को संविधान सभा की प्रथम बैठक की अध्यक्षता अस्थायी अध्यक्ष डॉ सच्चिदानंद सिन्हा ने की थी।
  • 11, दिसंबर 1946 को संविधान सभा ने डॉ राजेंद्र प्रसाद को निर्विरोध अपना स्थायी अध्यक्ष चुना।
  • 13, दिसंबर 1946 को संविधान सभा में पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा उद्देश्य प्रस्ताव रखा गया। जिसे सात दिनों के विचार-विमर्श के बाद 13, जनवरी 1947 को संविधान सभा ने पारित कर दिया। यही उद्देश्य प्रस्ताव भारतीय संविधान की उद्देशिका या प्रस्तावना बना।
  • संविधान सभा ने 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिनों का समय लगा कर संविधान का निर्माण किया था। इस दौरान 165 दिनों की कार्य अवधि में कुल 11 अधिवेशन हुए थे। 11 वें अधिवेशन के अंतिम दिन 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा के सदस्यों ने भारत की जनता के प्रतिनिियों के रूप में संविधान को अंगीकृत और आत्मार्पित किया। इन 11 अधिवेशनों के अलावा एक और अधिवेशन 24 जनवरी 1950 को हुई थी जिसमें सदस्यों द्वारा संविधान पर हस्ताक्षर किए गए।

संविधान सभा ने अपने सदस्यों से बने 8 प्रमुख समितियों का गठन किया था।

  1. नियम समिति – डॉ राजेंद्र प्रसाद।
  2. संचालन समिति – डॉ राजेंद्र प्रसाद।
  3. रियासत समिति – डॉ राजेंद्र प्रसाद।
  4. सलाहकार समिति – सरदार वल्लभ भाई पटेल। सलाहकार समिति की दो उप समितियां थीं; मूल अधिकार उप समिति के अध्यक्ष जे बी कृपलानी थे जबकि अल्पसंख्यक उप समिति के अध्यक्ष एच सी मुखर्जी थे।
  5. प्रांतीय संविधान समिति – सरदार वल्लभ भाई पटेल।
  6. प्रारूप समिति – डॉ भीमराव अम्बेडकर को संविधान का मसौदा या ड्राफ्ट प्रस्तुत करने वाली प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया। 29 अगस्त, 1947 को गठित प्रारूप समिति में अध्यक्ष डाक्टर अंबेडकर सहित कुल 7 सदस्य थे। अन्य 6 सदस्यों में एन गोपालस्वामी आयंगर, अल्लादि कृष्णा स्वामी अय्यर, के एम मुंशी, मोहम्मद सादुल्लाह, बी एल मित्र और डी पी खेतान थे। इनमें बी एल मित्र की जगह एन माधवराव को लिया गया तथा डी पी खेतान की मृत्यु के बाद टी टी कृष्णामाचारी को सम्मिलित किया गया।
  7. संघ शक्ति समिति – पं जवाहरलाल नेहरू।
  8. संघ संविधान समिति – अध्यक्ष पं जवाहरलाल नेहरू।
  • बी एन राव (बेनेगल नरसिंह राव) को सांवैधानिक सलाहकार नियुक्त किया गया।
  • संविधान सभा का चौथा अधिवेशन 14 जुलाई​ 1947 से 31 जुलाई 1947 तक चला था। इसी चौथे अधिवेशन में भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में तिरंगा को अपनाना गया।
  • राष्ट्रीय ध्वज के बीच के चक्र में चौबीस तीलियां हैं। केसरिया रंग ऊपर, बीच में सफेद रंग तथा हरा रंग नीचे है।
  • 24 जनवरी 1950 को जन गण मन को राष्ट्र गान के रूप में अपनाया गया।
  • राष्ट्र गान को गाने का समय 52 सेकंड निर्धारित है।
  • राजकीय चिन्ह को सारनाथ स्थित सम्राट अशोक के सिंह स्तंभ से लिया गया है। इसे राजकीय चिन्ह के रूप में 26 जनवरी 1950 को अपनाना गया।
  • राष्ट्रीय ध्वज की लंबाई चौड़ाई का अनुपात 3/2 है।
  • संविधान सभा की झंडा समिति के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद थे।
  • जबकि कांग्रेस के कराची अधिवेशन 1931 में गठित झंडा समिति के अध्यक्ष सरदार वल्लभ भाई पटेल थे।
  • भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
  • संविधान सभा में महिला सदस्यों की संख्या 15 थी :- 1.  विजयलक्ष्मी पंडित, 2. राजकुमारी अमृत कौर, 3. सरोजिनी नायडू, 4. सुचेता कृपलानी, 5. पूर्णिमा बनर्जी, 6. लीला राय, 7. जी दुर्गा बाई, 8. हंसा मेहता, 9. कमला चौधरी, 10. रेणुका राय, 11. मालती चौधरी, 12. दक्षयानी वेलायुदन, 13. बेगम एजाज रसूल, 14. ऐनी मस्करीनी और 15. अम्मू स्वामीनाथन।

अन्य तथ्य

  • भारतीय राजव्यवस्था में संविधान सर्वोच्च है।
  • भारत में न्यायिक पुनरावलोकन की संकल्पना संयुक्त राज्य अमेरिका से ली गयी है। न्यायिक पुनर्विलोकन का आशय यह है कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय कार्यपालिका के आदेशों और विधायिकाओं से पारित कानूनों का पुनरीक्षण कर सकता है। ऐसे पुनरीक्षण के बाद यदि कोई विधि या आदेश संविधान के प्रावधानों से असंगत पाया जाता है तो न्यायालय को यह शक्ति है कि उसे शून्य घोषित कर दे।
  • भारतीय संविधान में बहुत से एकात्मक लक्षणों के होते हुए भी यह मूलतः संघीय है। भारत की संघीय व्यवस्था अमेरिका की तरह शुद्ध संघीय नहीं हो कर कनाडा के नमूने पर है। कनाडा की तरह भारत में भी ऐकिक राज्य को प्रशासनिक सुविधा के लिए प्रांतों में बांटकर उन इकाइयों को शक्ति का वितरण कर दिया गया है। अर्थात् भारतीय संघ राज्य इसके इकाइयों के बीच किसी करार या समझौते का परिणाम नहीं है। इस लिए भारत संघ में मजबूत केंद्रीकरण की प्रवृत्ति पायी जाती है।
  • भारतीय संविधान में समवर्ती सूची को आस्ट्रेलिया के संविधान से लिया गया है। समवर्ती सूची में ऐसे विषयों को शामिल किया गया है, जिन केंद्र और राज्य दोनों को कानून बनाने का अधिकार है।
  • भारतीय​ संविधान में राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों को आयरलैंड के संविधान से लिया गया है।
  • नीति निदेशक तत्वों या नीति निदेशक सिद्धांतो को संविधान के भाग चार में अनुच्छेद 36-51 तक में समाहित किया गया है।
  • नीति निदेशक तत्व  यह बताते हैं कि भारत में प्रशासन और कानून का निर्माण किन सिद्धान्तों पर आधारित होना चाहिए।
  • नीति निदेशक सिद्धांत कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को लेकर चलते हैं।
  • मूल कर्तव्यों​ को स्वर्ण सिंह समिति की अनुशंसा पर संविधान में भाग चार (क) में अनुच्छेद 51(क) के रूप में 42 संविधान संशोधन अधिनियम 1976 के द्वारा शामिल किया गया है।
  • भारतीय संविधान में मूल कर्तव्यों को पूर्व सोवियत संघ के संविधान से लिया गया है।
  • मूल अधिकारों की अवधारणा, सर्वोच्च न्यायालय तथा उपराष्ट्रपति से संबंधित प्रावधान अमेरिका के संविधान से लिया गया है 
  • संसदीय प्रणाली ब्रिटेन से ली गयी है।
  • भारत में गणतंत्रात्मक प्रणाली को फ्रांस से लिया गया। गणतंत्रात्मक व्यवस्था में राज्य का प्रधान निर्वाचित होता है। जबकि ब्रिटेन में प्रजातंत्र है। वहां राजप्रमुख आनुवंशिक राजा होता है।
  • संविधान के मूल पाठ में 22 भाग, 395 अनुच्छेद तथा 8 अनुसूचियां थी।
  • संविधान का भाग एक संघ राज्य क्षेत्र से संबंधित है। भाग दो नागरिकता से संबंधित है। भाग तीन मूल अधिकारों से, भाग चार निदेशक सिद्धांतों से और भाग चार (क) मूल कर्तव्यों​ से संबंधित है।

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