भारत के प्रमुख दर्रे

भारत के प्रमुख दर्रे

पहाड़ों के बीच आवागमन के प्राकृतिक रास्ते को दर्रा कहते हैं। ये दर्रे प्राचीन नदियों के प्रवाह से पर्वतों के कटाव के कारण या फिर भूकंप, ज्वालामुखी आदि के कारण बने हुए हैं। आदि काल से इन दर्रों का इस्तेमाल प्रवास, यात्रा, व्यापार और युद्ध के लिए किया जाता रहा है। हालांकि कई दर्रे बहुत ही दुर्गम हैं।

भारत भूमि के दर्रों को दो प्रकारों में बांटा जा सकता है – हिमालय क्षेत्र के दर्रे और प्रायदीप के दर्रे।

हिमालय क्षेत्र के दर्रे

जम्मू-कश्मीर में स्थित दर्रे

बनिहाल दर्रा – बनिहाल दर्रा पीर पंजाल पर्वत श्रेणी में स्थित है। यह जम्मू को श्रीनगर से जोड़ता है। जवाहर सुरंग बन जाने के कारण इस दर्रे का कम इस्तेमाल होता है। यह 2832 मीटर (9291 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है।

पीर पंजाल दर्रा – यह दर्रा कश्मीर घाटी को जम्मू क्षेत्र को पूंछ और राजौरी जिले से जोड़ता है। इसकी ऊंचाई समुद्र तल से 3490 मीटर है।

पीर पंजाल दर्रा

जोजी-ला – अर्थात् जोजी दर्रा श्रीनगर को लेह और कारगिल से जोड़ता है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 01डी यहीं से गुजरता है। यह जास्कर श्रेणी में 3528 मीटर (11575 फीट) की ऊंचाई पर है। सर्दी के मौसम में यह बंद रहता है। इसमें भूस्खलन का खतरा हमेशा बना रहता है। इसलिए इसके नीचे एशिया की सबसे लंबी सुरंग जोजिला सुरंग का निर्माण किया जा रहा है।

जोजी-ला

बुरजिला – यह श्रीनगर को गिलगित और स्कर्दू से जोड़ता है। यह हिमालय श्रेणी में 4100 मी• (13,500 फीट) ऊंचाई पर है।

लद्दाख क्षेत्र के दर्रे

चांगला – यह महान हिमालय श्रेणी में स्थित है तथा लद्दाख को तिब्बत के तांगत्से कस्बे से जोड़ता है। यह 5360 मी (17590फीट) ऊंचाई पर है। यह दुनिया का तीसरा सबसे ऊंचा परिवहन योग्य दर्रा है।

काराकोरम दर्रा – यह दर्रा काराकोरम श्रेणी में स्थित है। यह भारत का सबसे अधिक ऊंचाई में स्थित दर्रा है जो सियाचिन ग्लेशियर के पास से भारत के पाक अधिकृत क्षेत्र को चीन गणराज्य के शिंजियांग क्षेत्र से जोड़ता है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 5654 मी है। वर्तमान में इस पर चीन का कब्जा है।

काराकोरम दर्रा

अगहिल दर्रा – यह दर्रा काराकोरम श्रेणी के K-2 चोटी के उत्तर में लद्दाख क्षेत्र को चीन के सिकियांग क्षेत्र से जोड़ता है। यह 5306 मी ऊंचाई पर है।

इमिस ला – लद्दाख को तिब्बत से जोड़ता है।

खारदुंग ला – यह लद्दाख क्षेत्र में है। संभवतः दुनिया का उच्चतम दर्रा है जो परिवहन योग्य है। यह लेह को मध्य एशिया के काशगर से जोड़ने वाले ऐतिहासिक मार्ग पर स्थित है। यह श्योक और नुब्रा घाटियों को जोड़ता है। इसकी ऊंचाई 5602 मी मानी गई है जो कि विवादित भी है।

लनक ला – लनक दर्रा लद्दाख के अक्साईचीन क्षेत्र में है 5466 भी (17993 फीट) की ऊंचाई पर है। इस क्षेत्र पर चीन का कब्जा है। यह दर्रा लद्दाख को ल्हासा (तिब्बत) से जोड़ता है।

हिमाचल प्रदेश में स्थित दर्रे

बारलाप्चा-ला – बारलाप्चा दर्रा जास्कर श्रेणी में हिमाचल प्रदेश में स्थित है और मंडी को लेह से जोड़ता है।

शिपकी-ला – हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले को तिब्बत के जान्दा जिले से जोड़ता है। शिमला से तिब्बत मार्ग शिपकीला से गुजरता है। सतलुज नदी इसी दर्रे से होकर भारत में प्रवेश करती है। भारत और चीन के बीच अधिकतर व्यापार शिपकला से ही होता है। यह 4300 मी ऊंचाई पर स्थित है। शिपकी दर्रा हिमाचल प्रदेश में धौलाधार श्रेणी में स्थित है।

देब्सा दर्रा – हिमाचल प्रदेश में स्थित है। कुल्लू और स्पीति जिलों को जोड़ता है। यह महान हिमालय की श्रेणी में 5360 भी (17590 फीट) की ऊंचाई पर है।

रोहतांग दर्रा – यह भी हिमाचल प्रदेश में पीर पंजाल श्रेणी में स्थित है। इसकी ऊंचाई 4631 मी है।

नीति दर्रा – उत्तराखंड में कुमायूं श्रेणी स्थित है। मानसरोवर झील और कैलाश पर्वत जाने का रास्ता यही से है। 5389 मी ऊंचा है।

नीति दर्रा
स्रोत: bharatdiscovery/फ़ौज़िया ख़ान

उत्तराखंड में स्थित दर्रे

उत्तराखंड के दर्रे इस राज्य को तिब्बत से जोड़ते हैं।

लिपु लेख – यह दर्रा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में स्थित है। यह कुमायुं क्षेत्र को तिब्बत में पुरंग से जोड़ता है। 5334 मी (17500 फीट) ऊंचा है। कैलाश मानसरोवर यात्री इसी दर्रे से जाते हैं।

माना दर्रा – उत्तराखंड में महान हिमालय की श्रेणी में स्थित है। यह उत्तराखंड को तिब्बत से जोड़ता है। यह दुनिया का सबसे ऊंचा रास्ता है जो 18192 फीट या 5545 मी है। यह नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व में माना शहर एवं बद्रीनाथ के पास है।

मंगशा धुर्रा दर्रा – यह उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में है तथा इस क्षेत्र को तिब्बत से जोड़ता है।

मुनिंग ला – यह दर्रा गंगोत्री के ऊपर उत्तराखंड में है तथा तिब्बत को जाता है। लेकिन इसमें साल भर बर्फ होने से कभी आवागमन नहीं होता।

सिक्किम में स्थित दर्रे

नाथूला – नाथू दर्रा सिक्किम में है। जो कि चुंबी घाटी होकर तिब्बत जाने का रास्ता है।

नाथुला दर्रा

जेलेप ला – जेलेप दर्रा यह चुंबी घाटी में स्थित है और सिक्किम से तिब्बत के ल्हासा को जोड़ता है। यह 4270 मी या 14009 फीट ऊंचा है।

अरुणाचल प्रदेश में स्थित दर्रे

बोमडि-ला – यह अरुणाचल प्रदेश के त्वांग घाटी से ल्हासा (तिब्बत) को जोड़ता है। यह अरुणाचल प्रदेश में 2217 मी (7273 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है।

दिहांग दर्रा – यह अरुणाचल प्रदेश को म्यांमार के मांडले से जोड़ता है। समुद्र तल से 1220 भी ऊंचा है।

यांग्याप दर्रा – भारत में ब्रह्मपुत्र नदी का प्रवेश इसी दर्रे से होता है।

दिफु दर्रा – अरुणाचल प्रदेश में है। यह भी राज्य को मांडले से जोड़ता है लेकिन दिहांग दर्रा की तुलना में छोटा और आसान है। यह वर्ष भर खुला रहता है और भारत, चीन तथा म्यांमार की सीमाओं के नजदीक है। यह असम के भी नजदीक है। यह प्राचीन व्यापार मार्ग है।

लिखापनी दर्रा – यह अरुणाचल प्रदेश को म्यांमार से जोड़ता है। यह साल भर चालू रहता है। 4000 मीटर से भी ऊंचा है।

कांगली फर्पोला, आदि दर्रे भी अरुणाचल प्रदेश में हैं।

मणिपुर

तुजु दर्रा – इंफाल से तामू और म्यांमार जाने का रास्ता इस दर्रे से है।

प्रायद्वीपीय भारत के दर्रे

महाराष्ट्र के दर्रे

थालघाट – यह पश्चिमी घाट में स्थित है। यह समुद्र तल से 583 मीटर ऊंची है। दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग और सड़क यहीं से गुजरती हैं।

भोरघाट – यह भी महाराष्ट्र में पश्चिमी घाट में स्थित है। यहीं से पूणे-बेलगांव रेल मार्ग और सड़क गुजराती हैं।

केरल

पालघाट दर्रा – नीलगिरि और अन्नामलाई पर्वतों के बीच स्थित है। पालघाट केरल और तमिलनाडु को जोड़ता है। कोयंबटूर-इंदौर मार्ग यहीं से जाता है।

सार-संक्षेप

जम्मू-कश्मीर के दर्रे

  • बनिहाल – जम्मू को श्रीनगर से
  • पीर पंजाल – जम्मू को पूंछ और राजौरी से
  • बुर्जिला – श्रीनगर को गिलगित से
  • जोजीला – श्रीनगर को लेह से

लद्दाख क्षेत्र के दर्रे

  • काराकोरम – लद्दाख को चीन के शिंजियांग से
  • चांग ला – लद्दाख को तिब्बत से
  • खारदुंग – श्योक और नुब्रा घाटी के बीच
  • अगहिल – लद्दाख को चीन के सिंकियांग से।
  • लनक ला – लद्दाख को तिब्बत के ल्हासा से

हिमाचल प्रदेश के दर्रे

  • बारालाचा दर्रा – मंडी को तिब्बत से
  • शिपकी दर्रा – किन्नौर को तिब्बत के ज़ान्दा ज़िले से
  • देब्सा दर्रा – कुल्लू को स्पीति से
  • नीति दर्रा – कैलाश मानसरोवर के लिए रास्ता
  • लिपुलेख दर्रा – कुमायूं को तिब्बत से
  • माना दर्रा – पिथौरागढ़ को तिब्बत से
  • मंगशा दर्रा – पिथौरागढ़ को तिब्बत से
  • मुनिंग दर्रा – पिथौरागढ़ को तिब्बत से

सिक्किम

  • नाथू-ला – चुंबी घाटी को तिब्बत से
  • जेलेप ला – सिक्किम को तिब्बत से

अरुणाचल प्रदेश

  • बोमडी ला – त्वांग घाटी को ल्हासा (तिब्बत) से।
  • दिहांग दर्रा – अरुणाचल प्रदेश को मांडले से
  • यांग्याप दर्रा – ब्रह्मपुत्र का भारत में प्रवेश मार्ग
  • दीफू दर्रा – अरुणाचल प्रदेश को मांडले से
  • लिखापनी दर्रा – अरुणाचल प्रदेश को म्यांमार से।
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