मुगलकालीन वास्तुकला

मुगलकालीन वास्तुकला

मुगलकालीन वास्तुकला बेहतरीन है और इसे किसी भी युग के मुकाबले रखा जा सकता है। इस समय की कुछ मुख्य इमारतें निम्नलिखित हैं :-

स्थापत्यस्थाननिर्माणकर्ता
शेरशाह का मकबरासासाराम, बिहारशेरशाह सूरी
पुराना किलादिल्लीशेरशाह सूरी
लाल किलाआगराअकबर
लाहौर का किलालाहौरअकबर
बुलंद दरवाजाफतेहपुर सीकरीअकबर
पंच महलफतेहपुर सीकरीअकबर
शेख सलीम चिश्ती की दरगाहफतेहपुर सीकरीअकबर
इबादत खानाफतेहपुर सीकरीअकबर
हुमायूं का मकबरादिल्लीअकबर
एत्माद्दौला का मकबराआगरानूरजहां
जामा मस्जिददिल्लीशाहजहां
लाल किलादिल्लीशाहजहां
जामा मस्जिदआगराबेगम जहांआरा

अकबर का योगदान

अकबर के समय में वास्तुकला की सबसे बड़ी उपलब्धि है आगरा से लगभग 40 किलोमीटर दूर फतेहपुर सीकरी में एक नई राजधानी का निर्माण। इसका घेरा 10 किलोमीटर से अधिक का है। फतेहपुर सीकरी में आज भी अनेक भव्य इमारतें खड़ी हैं।

बुलंद दरवाजा : फतेहपुर सीकरी में अकबर के द्वारा खानदेश (गुजरात) विजय के उपलक्ष में बनाया गया। यह सीकरी के दक्षिणी द्वार पर है तथा बलुआ पत्थर से निर्मित है। बुलंद दरवाजा की मेहराब लगभग 41 मीटर चौड़ी तथा लगभग 50 मीटर ऊंची है। यह दुनिया का संभवत: सबसे प्रभावशाली दरवाजा है।

पंच महल : फतेहपुर सीकरी के प्रांगण में स्थित पंच महल अकबर की समावेशी सृजनात्मकता का उत्कृष्ट निदर्शन है। यह बौद्ध पगोडा शैली में पिरामिड के आकार में पांच खंडों में निर्मित है। पंच महल में पत्थरों पर लकड़ी के मानिंद महीन नक्काशी की गई है।


जोधाबाई का महल : जिस इमारत को जोधाबाई का महल कहा जाता है वह प्राचीन भारतीय शैली में है।

जामी मस्जिद में ईरानी प्रभाव दिखाई देता है। इसके चारों ओर उपासना गृह है, उसमें अनेक कमरे हैं और ऊपर अनेक गुंबद हैं।

दीवाने आम और दीवाने खास उल्लेखनीय इमारतें हैं। उनकी योजना तथा अलंकरण, सभी विशिष्ट भारतीय शैली में हैं।

बीरबल का महल खूबसूरत डिजाइनों से सजा है।

शेख सलीम चिश्ती की दरगाह फतेहपुर सीकरी में अकबर के द्वारा बनाया गया है।

इबादतगाह : सीकरी में अकबर ने इबादतगाह भी बनवाया। इबादत खाना या प्रार्थना गृह में बादशाह की मौजूदगी में अनेक धर्मों के विद्वान् दर्शन और धर्म के प्रश्नों पर वाद-विवाद करते थे।

जहांगीर

अकबर का मकबरा सिकंदरा (आगरा) में स्थित है। इसकी योजना बादशाह अकबर के जीवन काल में बनी थी। किंतु यह 1605-13 के बीच जहांगीर के समय में निर्मित हुआ।

मुगल बादशाहों का, खासकर जहांगीर का एक और योगदान बागों का निर्माण करना था। जहांगीर ने लाहौर और श्रीनगर में कुछ खूबसूरत बाग लगवाए।

शाहजहां

मुगलों में भवन निर्माण का सबसे बड़ा प्रेमी था शाहजहां। उसके शासन काल में मुगल वास्तुकला का सबसे अधिक विकास हुआ। देश की कुछ शानदार इमारतें उसी के शासनकाल में बनीं। उसके जमाने में संगमरमर का, बारीक नक्काशी के कामों का, तरह-तरह की मेहराबों और खूबसूरत मीनारों का दिल खोलकर इस्तेमाल किया गया। शाहजहां के इमारतों की सूची बहुत लंबी है। उसने आगरा के किले के अनेक इमारतों को पूरा कराया।

शाहजहां ने शाहजहांनाबाद (पुरानी दिल्ली) नामक नगर बसाया। लाल किला बनवाया और उसके अंदर अनेक इमारतें बनवाईं। आगरा के किले में दीवाने आम और दीवाने खास तथा मोती मस्जिद मुख्यत: सफेद संगमरमर से बने हैं और उनमें रंगीन पच्चीकारी का खूबसूरत काम किया गया है।

दीवाने खास में फारसी में यह उक्ति दर्ज है जो बहुत ही सही है :-

अगर फ़िरदौस बर रूए जमीं अस्त,

हमीं अस्तो, हमीं अस्तो, हमीं अस्त।

अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है तो यहीं है, यहीं है, यहीं है।

दिल्ली की जामा मस्जिद विशाल गुंबदों और मीनारों वाली है। यह देश की सबसे प्रसिद्ध मस्जिद है और दुनिया में इसकी सुंदरता की कम मिशालें हैं।

ताजमहल को आगरा में शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की कब्र पर बनवाया। दाम्पत्य प्रेम के इस महान स्मारक का मुख्य वास्तुकार उस्ताद ईसा खां थे। ताजमहल शाहजहां की बनवाई सबसे भव्य इमारत है। प्रवेशद्वार, मध्य भाग का गुंबद, शानदार मीनारें, बारीक नक्काशी, संगमरमर के रंगीन टुकड़ों और कीमती पत्थरों की खूबसूरत पच्चीकारी, चारों तरफ खूबसूरत बाग और सामने के फव्वारे – ताजमहल के सभी भाग पूर्णता का संकेत देते हैं।

जहांगीर का मकबरा उसकी बेगम नूरजहां ने शाहजहां के समय में लाहौर के शाहदरा में बनवाया था।

मयूर सिंहासन (तख्ते ताऊस) को शाहजहां ने बनवाया था। 1739 में नादिरशाह इस सिंहासन को फारस ले गया लेकिन दुर्भाग्यवश अब यह दुनिया में कहीं नहीं है।

औरंगजेब

औरंगजेब अंतिम महान मुगल बादशाह था। उसके शासनकाल के उल्लेखनीय इमारतों में लाहौर की बादशाही मस्जिद, दिल्ली की मोती मस्जिद तथा बीबी का मकबरा है जो औरंगाबाद महाराष्ट्र में स्थित है। इसे औरंगजेब ने काले संगमरमर से बनवाया।

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