मैनपाट: छत्तीसगढ़ का शिमला (Mainpat: Shimla of Chhattisgarh)

🌿हमर मैनपाट

परिचय

प्रकृति की मनमोहक वादियों में अवस्थित व छुरी-उदयपुर की पहाड़ियों से संलग्न मैनपाट अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विख्यात है। यहां टाऊ की फसल होने के कारण ज्यादातर क्षेत्र टाऊ की सफेद फूलों से ढका होता है जो सफेद बर्फ की चादर के समान दिखाई देता है यही कारण है कि इसे
छत्तीसगढ़ का शिमला” भी कहा जाता है ।

पहुंच मार्ग

मैनपाट जाने के लिए मुख्य रूप से दो मार्ग हैं, पहला मार्ग सीतापुर क्षेत्र से आपको मैनपाट की सैर करा सकता है, वहीं दूसरा मार्ग सरगुजा जिला मुख्यालय अंबिकापुर से प्रारंभ होकर लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मैनपाट पहुंचा सकता है।

प्रमुख विशिष्टताऐं

समुद्र तल से 1152 मीटर (अधिकतम) ऊंचाई पर स्थित इस पठारीय भू भाग का प्रथम ग्राम आमगांव है यहीं से पर्यटकों को प्राकृतिक दृश्यों के सौंदर्य बोध का सौभाग्य प्राप्त होता है, मैनपाट ना केवल अपने प्राकृतिक दृश्यों के लिए विख्यात है अपितु अपने प्राकृतिक रहस्यों के लिए भी जाना जाता है, चाहे हम बात उल्टापानी की करें या दलदली भूमि की दोनों ही प्रकृति के नियमों के विपरीत ही अपना नियम बनाए बैठे हैं, अतः हम कह सकते हैं की मैनपाट की प्राकृतिक विविधता ही इसकी विशिष्टता है।

आइए चलते हैं इसी मैनपाट की सैर पर:

भौगोलिक संरचना

मैनपाट छत्तीसगढ़ के उत्तर में जशपुर सामरी पाठ प्रदेश के अंतर्गत आने वाला एक ऊंचा व ठंडा पठारी भू-भाग है तथा इसका विस्तार लगभग 68 वर्ग किलोमीटर में है। इसकी भूगर्भिक संरचना में दक्कन ट्रैप की चट्टाने पाई जाती है जिसके कारण यहां लेटराइट मिट्टी की अधिकता है।

धार्मिक महत्व के स्थल

1. काली मंदिर

यह अंबिकापुर मैनपाट मुख्य मार्ग पर घाटी के मध्य में स्थित मां काली का मंदिर है, मंदिर के कारण ही इस घाटी हो कालीघाट के नाम से जाना जाता है।

2. गोवर्धन मंदिर

यह सपनादर नामक ग्राम में स्थित भगवान शिव तथा राधा-कृष्ण का मंदिर है, यहां एक वटवृक्ष है जिसकी आकृति गोवर्धन पर्वत के समान होने के कारण ही इस मंदिर को गोवर्धन मंदिर कहा जाता है।

3. बौद्ध मंदिर

यह मंदिर कमलेश्वरपुर में स्थित है तथा इनकी संख्या तीन है जो कि अलग-अलग स्थानों पर बने हुए हैं, इनका निर्माण परंपरागत बौद्ध वास्तुकला के अनुसार किया गया है तथा यहां पूजा बौद्ध परंपरा से की जाती है।

4. बंजारी माता मंदिर

यह टाइगर प्वाइंट जल प्रपात के पास ही स्थित बंजारी माता का मंदिर है, ज्यादातर पर्यटक माता जी का दर्शन करने को जाते हैं।

प्राकृतिक व पर्यटन स्थल

1. आमगांव

यह प्राकृतिक दृष्टि से बेहद सुंदर स्थान है,यहां से अनेक प्राकृतिक दृश्य देखे जा सकते हैं साथ ही अंबिकापुर शहर की लाइटों का नजारा भी रात्रि के समय दिखाई देता है, जो काफी रोमांचक होता है।

2. उल्टा पानी

यह मैनपाट के बिसरपानी नामक ग्राम में स्थित है जो अपने अप्राकृतिक व्यवहार के कारण प्रसिद्ध है,यहां पानी निम्न स्तर से उच्च स्तर की ओर प्रवाहित होता है जो पर्यटकों के कौतूहल का विषय बना हुआ है।

3. टाइगर पॉइंट

मैनपाट के पूर्वी भाग से महादेवमुड़ा नदी बहती है तथा यह नदी आगे चलकर 60 फीट ऊंचाई से गिरता एक जलप्रपात का निर्माण करता है, पहले यहां टाइगर घूमा करता था इसी कारण से इसका नाम टाइगर प्वाइंट पड़ा, यह बेहद खूबसूरत जलप्रपात है तथा इस जलप्रपात को नीचे से देखने के लिए सीढ़ियों का निर्माण किया गया है।

4. मेहता पॉइंट

यह सरगुजा-रायगढ़ सीमा पर स्थित प्राकृतिक दृश्यों के लिए विख्यात है, यहां से रायगढ़ क्षेत्र के प्राकृतिक दृश्य देखे जा सकते हैं।

5. मछली प्वाइंट

यह जलप्रपात ललेया ग्राम के समीप स्थित है, यहां सघन वनों के मध्य प्रवाहित मछली नदी आगे चलकर एक चौड़ी जलप्रपात का निर्माण करती है जो कि मछली पॉइंट के नाम से जाना जाता है, यह जलप्रपात प्राकृतिक दृष्टि से काफी सुंदर व मनमोहक है।

6. जलजली दलदली

यहां एक दलदल भू-भाग के समान है, यह अपने आप में एक आश्चर्यजनक भूमि है यहां पर्यटक जब छलांग लगाते हैं तो भूमि से स्प्रिंग की भांति प्रतिक्रिया होती है, यह पर्यटकों के मनोरंजन का एक माध्यम बन जाता है।

अन्य प्रमुख स्थल:

  1. मुर्गा घोघरा जलप्रपात
  2. किंग पॉइंट जलप्रपात
  3. आमगांव जलप्रपात
  4. एप्पल गार्डन व आलू व शीतोष्ण फल अनुसंधान केंद्र – बरीमा
  5. सनसेट पॉइंट – परपटिया
  6. दूल्हा दुल्हन पत्थर

प्रमुख नदियां

  1. मांड नदी
  2. मछली नदी

प्रमुख जनजातियां

मैनपाट में मुख्य रूप से मांझी, मझवार, उरांव, कंवर, गोंड जनजाति के लोग निवास करते हैं।

अन्य जातियां

मैनपाट 1962 – 63 के भारत चीन युद्ध के बाद आए तिब्बती शरणार्थियों का प्रमुख शरण स्थल है, पूर्व से ही यह यादव समुदायों का निवास स्थान रहा है, इस प्रकार यहां अलग-अलग समुदाय के लोग मिलकर एक मिश्रित संस्कृति का निर्माण करते हैं।

अर्थव्यवस्था व उद्योग धंधे

यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि आधारित है, यहां मक्का, धान, आलू, टाऊ, कोदो – कुटकी की फसल प्रमुखता से होती है, साथ ही CMDC द्वारा संचालित बॉक्साइट खदान भी आय का प्रमुख स्रोत है।

पर्यटक विश्रामगृह

यहां पर्यटकों की रात्रि विश्राम हेतु अनेक सुविधा युक्त निजी व अर्धशासकीय मोटल व रिसॉर्ट संचालित हैं, यहां पर्यटक कई एडवेंचर स्पोर्ट्स का भी आनंद उठा सकते हैं।

इस लेख के माध्यम से मैंने मैनपाट की जानकारी आप तक पहुंचाने का प्रयास किया, उम्मीद है आपको पसंद आया होगा, धन्यवाद। 😇🙏

लेखक – जितेंद्र कुमार यादव

@ सर्वाधिकार सुरक्षित

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