सिन्धु घाटी की सभ्यता

सिन्धु घाटी की सभ्यता

  • कालक्रम 2350 – 1750 ईसा पूर्व।
  • क्षेत्रफल 1299600 वर्ग किमी।
  • आकर त्रिभुजाकार।
  • सिन्धु सभ्यता भारत की प्रथम नगरीय सभ्यता थी।
  • सिन्धु सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि सिन्धु सभ्यता में सर्वप्रथम हड़प्पा नामक स्थल  खोज 1921 में दयाराम साहनी ने की।
  • सन् 1922 ईसवी में राखालदास बनर्जी ने मोहनजोदड़ो स्थल की खोज की।

सिन्धु सभ्यता के प्रमुख केंद्र

केंद्रनदी तटवर्तमान राज्य
हड़प्पारावीपंजाब (पाकिस्तान)
मोहनजोदड़ो सिन्धुसिन्ध (पाकिस्तान)
चन्हूदड़ो सिन्धुसिन्ध (पाकिस्तान)
कोटदीजी सिन्धुसिन्ध (पाकिस्तान)
रंगपुरभोगवागुजरात
लोथलभोगवागुजरात
धौलावीरागुजरात
बनावलीरंगोईहरयाणा
कालीबंगांघग्गरराजस्थान
रोपड़सतलजपंजाब
डाबर कोटसिन्ध (पाकिस्तान)
सुतकागेंडोरदाश्कबलूचिस्तान (पाकिस्तान)
आलमगीरपुरहिण्डनउत्तर प्रदेश
सुरकोटदागुजरात
  • लोथल से गोदीबाड़ा (बंदरगाह), तथा मनका बनाने कारखाना एवं कपास के सबूत मिले हैं।
  • मोहनजोदड़ो का अर्थ है – मुर्दों का टीला।
  • मोहनजोदड़ो से विशाल स्नानागार के साक्ष्य मिले है।
  • मोहनजोदड़ो से नर्तकी की कांस्य प्रतिमा मिली है।
  • सिन्धु सभ्यता की अधिकांश मूर्तियाँ मातृदेवी की है, वे लोग कूबड़ वाले सांड, तथा पशुपति शिव की भी पूजा करते थे।
  • रंगपुर एवं लोथल से चावल के दाने मिले हैं।
  • सिन्धु सभ्यता के लोग गाय तथा घोड़े के महत्व से परिचित नहीं थे।
  • सुरकोतदा से घोड़े की हड्डियाँ मिली हैं।
  • सिन्धु सभ्यता समाज चार भागों में बटा था –
    1. व्यापारी
    2. विद्वान
    3. श्रमिक
    4. सैनिक
  • मेसोपोटामिया के लोग सिन्धु क्षेत्र को मेलुहा कहते थे।
  • अंतिम संस्कार का सबसे प्रचलित तरीका शवाधान (दफनाना) था।
  • नगर एवं घरों का विन्यास ग्रिड  पद्धति पर आधारित था।
  • भारतीय गेंडे का प्रमाण आमरी से मिला।
  • मोहनजोदड़ो से प्राप्त अन्नागार (अनाज गोदाम) संभवतः सबसे बड़ी ईमारत थी।
  • हड़प्पा में 6 अनाज गोदाम मिले हैं।
  • हड़प्पा स्थल के दक्षिणी भाग मे एक कब्रिस्तान मिला है जिसे “R-37” नाम दिया गया है।

खनिज/रत्न और उनके स्रोत

खनिज/रत्नस्रोत
ताम्बाखेतरी
टिनअफगानिस्तान
लाजवर्द मणिकश्मीर/अफगानिस्तान
नील मणिबदख्शाँ
सोनाअफगानिस्तान
चाँदीअफगानिस्तान, ईरान
सीसादक्षिण भारत
कार्नेलियनगुजरात, सिन्ध
फिरोजामध्य एशिया
गोमेदसौराष्ट्र
शंख एवं कौड़ियांसौराष्ट्र

One Response

  1. dhiraj singh सितम्बर 27, 2016

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