स्टीफन विलियम हॉकिंग : प्रेरणादायक महावैज्ञानिक

महान ब्रह्मांड वैज्ञानिक, लेखक और बेहद ही शानदार इंसान, स्टीफन विलियम हॉकिंग का नाम सुनते ही एक ही ऐसे योद्धा की तस्वीर सामने आती है जिसने कभी हारना नहीं सीखा।

नियति ने उनकी परीक्षा लेनी चाहिए पर वह नियति के लिए ही सवाल बन गए, ब्रह्मांड के रहस्यों को लेकर आमजन में जितने भी सवाल थे वह उन सवालों के जवाब बन गए, उन्होंने जिंदगी को ऐसे जिया कि आमजन के लिए हौसला व कुदरत को भी हैरान कर गये, आज इन्हीं महावैज्ञानिक कि हम चर्चा करेंगे –

जीवन परिचय

8 जनवरी 1942 को ऑक्सफोर्ड में जन्में स्टीफन विलियम हॉकिंग की शुरुआती पढ़ाई लंदन में हुई,  परिवार बेहद ही शिक्षित था पर पारिवारिक परंपरागत शिक्षा उन्हें रास नहीं आई तथा 1959 में “नेचुरल साइंस” की पढ़ाई करने के लिए उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया, इसके बाद 1962 में वे ब्रह्मांड विज्ञान में पीएचडी के लिए कैंब्रिज चले गए, कैंब्रिज में उनकी पढ़ाई “प्रॉपर्टीज ऑफ़ एक्सपेंडिंग यूनिवर्स” नाम के शोध के बाद पूरी हुई तथा उन्होंने ब्रह्मांड विज्ञान से पीएचडी की पढ़ाई पूरी की।

इस पढ़ाई के दौरान जब वह 21 साल के थे तो 1963 में उन्हें “मोटर न्यूरॉन्स” नामक बीमारी ने जकड़ लिया तथा डॉक्टर ने संभावना व्यक्त की कि वे अब आने वाले महज 2 से 3 साल तक ही जिंदा रह सकते हैं, वे हार नहीं माने पर इस बीमारी से ग्रसित होने के बाद उन्हें “एम्योट्रोफिक लैटरल स्क्लेरोसिस” बीमारी के कारण लकवा मार गया तथा वे शारीरिक रूप से अक्षम हो गए।

“अभी मैं अभी और जीना चाहता हूं” की जज्बे में उन्हें उनके हौसले बुलंद रखे, कुछ दिनों तक लड़खड़ाते जुबान से बात करने के बाद उनकी जुबान भी साथ छोड़ गई तथा ताउम्र स्पीच सिंथेसाइजर के सहारे लोगों से बातचीत करनी पड़ी, वर्ष 1970 में उन्होंने ” सामान्य सापेक्षिता ” पर अपना शोध पत्र लिखा। वे 1979 में वे “कैंब्रिज यूनिवर्सिटी” में प्रोफेसर बने तथा वर्ष 2009 तक उन्होंने वहां अपनी सेवाएं दी, इस दौरान वर्ष 2001 में वे भारत आए थे तथा उन्होंने राष्ट्रपति के० आर० नारायणन से मुलाकात भी की थी। 

वे अंतरराष्ट्रीय फिजिक्स सेमिनार में शामिल हुए तथा इस दौरान उन्हें प्रथम सरोजनी दामोदरन फेलोशिप से सम्मानित किया गया था। 1988 में उनकी मशहूर किताब “अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम” प्रकाशित हुई, उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उनके जीवनकाल में उन्हें 13 मानद डॉक्टरेट उपाधियां मिली।

उन्हें 1978 में “अल्बर्ट आइंस्टीन पुरस्कार”, 1988 में वॉल्फ प्राइस, 1902 में “कंपेनियम ऑफ ऑनर” सम्मान व 2009 में “प्रेसीडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम” सम्मान दिया गया।

वर्ष 2003 में उन्हें “फंडामेंटल फिजिक्स पुरस्कार” व 2006 में “कोप्ले मेडल” से सम्मानित किया गया, वे रॉयल सोसाइटी के अलावा अमेरिकी नेशनल अकादमी के भी सदस्य रहे, 2014 में उनके जीवन पर आधारित “द थ्योरी ऑफ एवरीथिंग” नाम से फिल्म भी बनी तथा 14 मार्च 2018 को एक लंबी बीमारी के संघर्ष के बाद वे पंचतत्व में विलीन हो गए।

आधुनिक भौतिक विज्ञान में उनका योगदान

स्टीफन हॉकिंग ने ब्रह्मांड विज्ञान के अलावा गुरुत्वाकर्षण, क्वांटम थ्योरी व सूचना सिद्धांत व थर्मोडायनेमिक्स पर भी काम किया उन्होंने अपनी “थ्योरी ऑफ एवरीथिंग” में कुछ संभावनाओं की जिक्र की थी जो निम्नांकित हैं :

  1.  ब्रम्हांड का निर्माण व अंत का कारण जानना जरूरी है।
  2.  उन्होंने संभावना व्यक्त की की गुरुत्वाकर्षण की वजह से ब्रह्मांड फिर से शुरू होगा।
  3.  उन्होंने ब्रह्मांड को चलाने के लिए भगवान को जरूरी नहीं बताया।

उन्होंने अपने एक भाषण “लाइफ इन द यूनिवर्स” में भविष्य में इंसान व एलियननो की मुलाकात की संभावना जताई थी। उनका प्रमुख योगदान ब्लैक होल पर है, उन्होंने स्पष्ट किया :

  1. की ब्लैक होल का आकार लगातार बढ़ता है वह कभी घटता नहीं।
  2. ब्लैक होल को छोटे ब्लैक होल में विभाजित नहीं किया जा सकता, दो ब्लैक होलों के टकराने पर भी ऐसा नहीं होता

उन्होंने क्वांटम थ्योरी (परमाणु जैसी बेहद सूक्ष्म चीजों का विवरण दिया जाता है) व सामान्य सापेक्षता (तारों व आकाशगंगा का ब्रह्मांडीय पैमाने पर विवरण बताया जाता है) को साथ लाने का काम किया चूंकि यह दोनों एक दूसरे से अलग हैं परंतु इसके अध्ययन में उन्होंने अपना अभूतपूर्व योगदान दिया।
स्टीफन हॉकिंस ने कहा था –

” इंसानों को अपना वजूद बचाने के लिए पृथ्वी को छोड़ने की तैयारी करनी चाहिए तथा अन्य ग्रहों पर जीवन की खोज कर कालोनिया बनाने पर काम करना चाहिए “

स्टीफन विलियम हॉकिंग की प्रमुख किताब

  • 1973 – में उनकी पहली किताब ” द लार्ज स्केल स्ट्रक्चर ऑफ स्पेस टाइम “,
  • 1988 – में ” अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम ” यह सर्वाधिक लोकप्रिय किताब था तथा इसने ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में मदद की
  • 1993 – में ” ब्लैक होल्स एंड बेबी यूनिवर्स एंड अदर एक्सेस “
  • 2001 – में द यूनिवर्स इन अ नटसेल
  • 2013 – में ” माई ब्रीफ हिस्ट्री “

व अन्य कई किताबें साथ ही बच्चों के लिए भी उन्होंने अलग- अलग लेखकों के साथ मिलकर कई किताबें लिखी।

सार – इस सृष्टि में हजारों उदाहरण मौजूद होंगे पर शारीरिक अक्षमता व उत्कृष्ट बौद्धिक क्षमता का मिसाल सदैव आप से दी जाएगी।
धन्यवाद।

जितेंद्र कुमार यादव
©सर्वाधिकार सुरक्षित

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